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सभी जानते हैं कि ईरान युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की गणित बिगाड़ दी है। एशिया में कोरिया और जापान जैसे फौलादी देशों से लेकर यूरोप तक मिसाइलों और ड्रोन धमाकों कीहट पहुंची है।

लेकिन, इस आर्थिक मंथन में एक देश ऐसा निकला है जो दुनिया की सबसे बुलंद कंपनियों के लिए निवेश का एक आकर्षक ही नहीं, सुरक्षित विकल्प बन गया है।

कौन-कौन कर रहा है निवेश?

पिछले पांच महीनों में कम से कम छ: बड़ी कंपनियों के सीईओ ‘ब्लैंक चेक’ ले कर भारत आए हैं।

गूगल

टेक उद्योग की सरगना गूगल ने आंध्रप्रदेश में 15 बिलियन डॉलर निवेश की 18 फरवरी को घोषणा की। 1.4 लाख करोड़ रुपये का ये वायदा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटर और अंडरसी डेटा केबल के लिए था। गूगल ने टेक और एआई ट्रेनिंग को भी इस बजट में शामिल किया।

एबीबी

एक महीने बाद ही स्वीडन की एबीबी ने 9 मार्च को 75 मिलियन डॉलर निवेश की घोषणा की। करीब 700 करोड़ रुपये की ये राशि देश में कंपनी की फ़ैक्ट्रियों के विस्तार और अनुसंधान एवं विकास के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

एयरट्रंक

कंपनी का नाम कम ही लोगों ने सुना हो, लेकिन एक बंग्लादेशी मूल के सीईओ वाली इस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने भारत में 30 बिलियन डॉलर निवेश की 5 जून को घोषणा की। रुपये में ये भारी-भरकम 2.85 लाख करोड़ की रकम अगले पांच साल मे 5 गीगावॉट के डेटा सेंटर बनाने मे लगाई जाएगी।

सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स

जून में ही दुनिया से सबसे बड़े पेंशन फंड्स में से एक – कनाडा पेंशन प्लैन इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने 17 तारीख़ को 7,000 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की। ये पैसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘हाइपर स्केल’ डेटा सेंटर में लगाया जाएगा।

सांगोबें

फ्रांस की ये कंपनी दुनिया की सबसे पुरानी कंपनियों में से है। ये कंपनी 1665 में शुरू हुई थी – यानी छत्रपति शिवाजी और औरंगज़ेब के ज़माने में। हाल ही में फ्रांस के एवियान शहर में हुई जी-7 बैठक के दौरान कंपनी ने भारत में करीब 1,100 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।

ऐमेज़ॉन

इसी हफ़्ते, बिक्री के पैमाने पर विश्व की सबसे बड़ी कंपनी, ऐमेज़ॉन के एक वादे ने दुनिया को चौंका दिया। सीईओ एंडी जैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले और 48 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा कर डाली। यानी 4.5 लाख करोड़ रुपये। 2030 तक ये रकम एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होगी।

भारत – तूफान के बीच स्थिरता?

तो सवाल ये है कि ऐसे समय में जब कंपनियां अपने बजट, अपनी विस्तार योजनाओं पर ब्रेक लगा रही हैं, वो भारत और मोदी सरकार की योजनाओं पर क्यों महरबान हैं।

कारण चश्म-ए-शाही के पानी की तरह साफ हैं।

विदेशी कंपनियों के लिए भारत का तेज़ आर्थिक विकास और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्षमता वो चुंबकीय शक्ति है जिसका वो ज़्यादा समय तक विरोध नहीं कर सकते। भारत के पास कार्यकुशल स्टाफ कहीं कम लागत पर उपलब्ध है। भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और लगातार सुधरता मैन्यूफ़ैकचरिंग ईकोसिस्टम विदेशी कंपनियों को काम के लिए पका-पकाया मौका देता है।

और शायद सबसे बड़ा कारण… मोदी सरकार ने पिछले 12 साल में उद्योग के लिए नीतियों में जो स्थिरता लाई है, उससे भारत, दुनिया का सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश बना है। संदेश साफ है… आओ भारत की ‘ग्रोथ स्टोरी’ से जुड़ो, वरना पीछे छूटो।

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