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NITI Aayog Tourism Report: नीति आयोग ने भारत में पर्यटन और होटल कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े बदलावों का सुझाव दिया है। आयोग का कहना है कि कुछ देशों से आने वाले यात्रियों को Visa-on-Arrival की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके अलावा होटलों की मंजूरी, लाइसेंस और दूसरे नियमों को भी आसान बनाया जाना चाहिए।

ये सुझाव नीति आयोग की नई रिपोर्ट Unlocking Growth in Tourism and Hospitality Sector का हिस्सा हैं। यह रिपोर्ट पर्यटन मंत्रालय और इस सेक्टर से जुड़े लोगों से बात करने के बाद तैयार की गई है।

नीति आयोग का मानना है कि भारत में घूमने-फिरने की बहुत बड़ी संभावना है। देश में धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक जगहें, पहाड़, समुद्र, जंगल और बड़े शहर सब कुछ मौजूद है। इसके बावजूद कई बार नियमों की उलझन, मंजूरी में देरी और लंबी कागजी कार्रवाई की वजह से होटल प्रोजेक्ट अटक जाते हैं और विदेशी यात्री भी भारत आने से बचते हैं।

रिपोर्ट में सबसे बड़ा सुझाव कुछ चुने हुए देशों के यात्रियों के लिए 90 दिन का मल्टीपल एंट्री Tourist Visa-on-Arrival शुरू करने का है जिसके बाद वीजा की वैधता के दौरान यात्री एक से ज्यादा बार भारत आ सकेंगे। इससे भारत में बार बार आने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी । 

वीजा चुनना होगा आसान  

रिपोर्ट में भारत की वीजा व्यवस्था को भी आसान बनाने की बात कही गई है। नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि ई-वीजा कैटेगरी को कम करके कुछ बड़े वीजा ग्रुप बनाए जाएं। इनमें घूमने-फिरने, बिजनेस यात्रा, कम समय के इलाज, पढ़ाई और अटेंडेंट वीजा जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।

इससे यात्रियों के लिए वीजा चुनना आसान हो जाएगा। नीति आयोग ने टूरिस्ट रिफंड स्कीम पर भी विचार करने की बात कही है। इस स्कीम के तहत विदेशी यात्री भारत में खरीदारी करने पर जीएसटी रिफंड ले सकेंगे। इससे भारत में खरीदारी करने वाले विदेशी पर्यटकों को सीधा फायदा मिल सकता है।

होटल कारोबार के बदल सकते है नियम 

होटल कारोबार को लेकर भी रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में होटलों के लिए पर्यटन मंत्रालय की प्रोजेक्ट स्टेज मंजूरी खत्म करने का सुझाव दिया गया है। अगर ऐसा होता है, तो होटल बनाने या नए प्रोजेक्ट शुरू करने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर एक होटल में कई रेस्टोरेंट या सर्विस एरिया हैं, तो उसके लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत कम होनी चाहिए। ऐसे होटलों के लिए एक हेल्थ ट्रेड लाइसेंस और एक शराब लाइसेंस की व्यवस्था हो सकती है। शराब लाइसेंस और FSSAI रजिस्ट्रेशन की वैधता बढ़ाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

दफ्तरों के चक्कर कम करने की बात

नीति आयोग ने मंजूरी के काम को डिजिटल सिस्टम और सिंगल विंडो व्यवस्था से जोड़ने का सुझाव दिया है। इसका मतलब है कि होटल कारोबारियों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ें और ज्यादा काम एक ही जगह से हो सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में होटल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने से लेकर शुरू होने तक आम तौर पर 36 से 48 महीने लग जाते हैं। वहीं, आसियान देशों में ऐसे प्रोजेक्ट 12 से 18 महीने में पूरे हो जाते हैं। इसी देरी की वजह से भारत में होटल बनाने की लागत और समय बढ़ जाता  है । 

2024 में कितने यात्री आए भारत ?

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत में करीब 20.6 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्री आए। इसमें एनआरआई भी शामिल हैं। वहीं, विदेशी पर्यटकों की संख्या 9.95 मिलियन रही। वित्त वर्ष 2024 में पर्यटन और होटल सेक्टर ने देश की अर्थव्यवस्था में ₹15.73 लाख करोड़ का योगदान दिया। यह जीडीपी का 5.22 प्रतिशत है। इस सेक्टर से करीब 84.6 मिलियन लोगों को रोजगार भी मिला।

नीति आयोग का कहना है कि अगर भारत को दुनिया के बड़े पर्यटन केंद्रों में शामिल होना है, तो यात्रियों के लिए भारत आना आसान बनाना होगा। साथ ही होटल कारोबार से जुड़े नियमों को भी सरल करना होगा। अगर ये सुझाव लागू होते हैं, तो भारत में विदेशी यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवल एजेंसी, लोकल बाजार और रोजगार से जुड़े कई क्षेत्रों को इसका फायदा मिल सकता है।

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