Campus Recruitment Trends: भारत में कॉलेज से होने वाली हायरिंग का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। छात्र, कॉलेज और कंपनियां अब एक-दूसरे की जरूरतों को पहले से बेहतर समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद नौकरी देने के कई फैसले अब भी पुराने तरीकों से लिए जा रहे हैं।
साल 2026 में सबसे ज्यादा चर्चा स्किल्स-फर्स्ट हायरिंग की हो रही है। इसका मतलब है कि नौकरी देते समय डिग्री और नंबरों से ज्यादा छात्र की काबिलियत और काम करने की समझ को महत्व दिया जाए। कॉलेजों को लगता है कि कंपनियां ऐसा करने लगी हैं, लेकिन रिपोर्ट के आंकड़े कुछ और तस्वीर दिखाते हैं।
कितनी कंपनियां सच में स्किल्स को पहली जगह दे रही हैं?
AI आधारित भर्ती प्लेटफॉर्म HirePro की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 21% कंपनियों ने पूरी तरह स्किल्स-फर्स्ट हायरिंग अपनाई है। वहीं, 51% कंपनियां अब भी नौकरी देते समय CGPA को अहम मानती हैं। यानी कंपनियां स्किल्स जरूर देख रही हैं, लेकिन कॉलेज के नंबरों का असर अभी खत्म नहीं हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 42% कंपनियां अभी बदलाव के दौर में हैं। वहीं, 21% कंपनियों का कहना है कि उनका तरीका नौकरी और टीम के हिसाब से बदल जाता है।
कॉलेजों की सोच और कंपनियों की हकीकत में फर्क
कॉलेज चाहते हैं कि छात्रों को नौकरी उनके काम की समझ और स्किल्स के आधार पर मिले। उनका मानना है कि इससे पढ़ाई और नौकरी की जरूरतों के बीच का फर्क कम होगा।
हालांकि, 96% कॉलेजों को लगता है कि ज्यादातर कंपनियां पहले ही स्किल्स को सबसे ज्यादा महत्व दे रही हैं। दूसरी तरफ, कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि ऐसा अभी पूरी तरह नहीं हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 9% कंपनियां अब भी कॉलेज के नाम, डिग्री और पढ़ाई के रिकॉर्ड पर ज्यादा भरोसा करती हैं। वहीं, 7% कंपनियां इस नए तरीके को अभी छोटे स्तर पर आजमा रही हैं।
Gen-AI स्किल कितनी जरूरी है?
Gen-AI को लेकर भी छात्रों और कंपनियों की सोच अलग है। करीब 85% कंपनियां चाहती हैं कि छात्र Gen-AI के बारे में समझ रखते हों। लेकिन सिर्फ 12% कंपनियां इसे नौकरी देने की पक्की शर्त मानती हैं। वहीं, 44% कंपनियां इसे अच्छी और काम की स्किल के तौर पर देखती हैं।
इसका मतलब है कि ज्यादातर कंपनियां Gen-AI न जानने पर छात्र को सीधे बाहर नहीं करतीं। वे जरूरत पड़ने पर ट्रेनिंग देना पसंद करती हैं।
हर नौकरी में AI की जरूरत एक जैसी नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 29% कंपनियां टेक और नॉन-टेक नौकरियों के लिए AI स्किल की जरूरत अलग-अलग रखती हैं।
इससे साफ है कि नॉन-टेक नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के पास AI सीखने के लिए थोड़ा ज्यादा समय हो सकता है। कुल मिलाकर, कॉलेज हायरिंग में बदलाव शुरू हो चुका है, लेकिन स्किल्स-फर्स्ट तरीका अभी हर जगह लागू नहीं हुआ है।
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