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Union Budget 2026: यह पहली बार होगा जब वित्त मंत्री रविवार को बजट पेश करेंगी। आगामी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 27 के लिए आम बजट पेश करेंगी लेकिन उससे पहले मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ने अपनी उम्मीदें जताई हैं। चलिए जानते हैं। 

के.जे. सोमैया प्रबंधन संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र नेनावानी  ने कहा कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस समय एक मुश्किल वैश्विक माहौल से गुजर रहा है, जहां भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे माल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां सामने हैं। ये वजहें पूरे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार पर असर डाल रही हैं, जबकि लक्ष्य है कि 2047 तक जीडीपी में इसका योगदान 25% तक पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब सिर्फ छोटे-मोटे सुधार काफी नहीं होंगे। जरूरत है कुछ चुनिंदा अहम क्षेत्रों पर रणनीतिक तरीके से काम करने की, साथ ही PLI स्कीम, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और मेक इन इंडिया जैसी मौजूदा पहलों को और प्रभावी बनाने की।

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इन प्राथमिकताओं में सबसे अहम है डिजिटलीकरण। भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की रीढ़ माने जाने वाले MSME सेक्टर को न सिर्फ आधुनिक तकनीक अपनानी होगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसे डिजिटल टूल्स का सही इस्तेमाल करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। ऑपरेशनल स्तर पर डिजिटलीकरण से उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, डिलीवरी और सप्लाई चेन की प्रतिक्रिया क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है। इस दिशा में सरकारी सहयोग MSMEs की पुरानी प्रणालियों पर निर्भरता कम कर सकता है और उन्हें वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

इसके साथ ही स्किल्ड लेबर की उपलब्धता भी बेहद जरूरी है। प्रशिक्षित कार्यबल न सिर्फ कंपनियों की ट्रेनिंग लागत घटा सकता है, बल्कि नई तकनीकों को तेजी से अपनाने में भी मदद करता है। इसके लिए शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों में लगातार निवेश जरूरी है, ताकि इंडस्ट्री की जरूरतों और छात्रों की स्किल्स के बीच की खाई को पाटा जा सके। कुल मिलाकर, मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े अहम क्षेत्रों में ठोस पहल ही मौजूदा प्रदर्शन और तय लक्ष्यों के बीच के अंतर को कम कर पाएगी।

BIDSO के को-फाउंडर, आदित्य कृष्णकुमार ने बताया कि सरकार ने नेशनल एक्शन प्लान फॉर टॉयज के जरिए इस सेक्टर को लेकर लगातार और साफ प्रतिबद्धता दिखाई है, जिससे उद्योग में भरोसा मजबूत हुआ है। बजट 2025 ने इस रफ्तार को और मजबूती दी और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, आत्मनिर्भर खिलौना निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में नई उम्मीदें जगाईं।

उन्होंने कहा कि हाल की रिपोर्टों में करीब 13,000 करोड़ रुपये (लगभग 1.5 अरब डॉलर) के प्रस्तावित प्रोत्साहन कार्यक्रम की चर्चा है, जिसे संभावित PLI स्कीम के तहत लाया जा सकता है। इससे साफ है कि सरकार इस सेक्टर की ग्रोथ को लेकर गंभीर है। अब नजर आने वाले यूनियन बजट पर टिकी है- चाहे वह PLI के जरिए हो या किसी अन्य मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव के रूप में, क्योंकि ऐसे कदम खिलौना निर्माण क्लस्टर विकसित करने, स्किल्स बढ़ाने और ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड की पहचान के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खिलौनों का एक टिकाऊ इकोसिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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