एसएमएआरआर रियल्टी और रोहिणी स्थित होटल क्राउन प्लाजा से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की संभावित भूमिका पर फोकस तेज हो गया है।
यह मामला बिश्नुपुर थाना से जुड़ा है, जो 10 मई 2025 को कारोबारी दीपक कुमार लोहिया की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप है कि एसएमएआरआर रियल्टी से जुड़ी कंपनियों के जरिए करीब 19 करोड़ रुपये शेल कंपनियों और जटिल वित्तीय लेयरिंग के माध्यम से घुमाए गए, ताकि रकम को वैध दिखाया जा सके।
लोहिया ने यह भी दावा किया है कि अगर फॉरेंसिक जांच गहराई से हो तो कथित लेनदेन का दायरा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
5 जनवरी 2026 की सुनवाई में कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत की अनुमति के बिना कोई अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं होगी। कोर्ट ने ED और CBI को औपचारिक रूप से सूचित करने का निर्देश भी दिया। अगली सुनवाई 20 मार्च 2026 को तय है।
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि विकास सूर्या ग्रुप से एसएमएआरआर रियल्टी में हुए रीब्रांडिंग का कथित वित्तीय लेनदेन, स्वामित्व ढांचे या पूंजी प्रवाह से कोई संबंध है या नहीं। शिकायत के मुताबिक 2005-06 के दौरान अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों ने कथित तौर पर शेयर प्रीमियम बढ़ाकर दिखाए, फिर फेस वैल्यू पर बायबैक किया और बाद में मर्जर के जरिए ऑपरेटिंग कंपनियों की पूंजी संरचना बदली।
सूत्रों के अनुसार एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि एसएमएआरआर रियल्टी ग्रुप की परियोजनाओं और रोहिणी स्थित होटल ऑपरेशंस में लगाए गए निवेश कहीं कुछ ट्रेडिंग सेक्टर से रूट होकर तो नहीं आए। कुछ गुटखा कारोबारियों से जुड़े कथित निवेश भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
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