तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए एक ‘व्हाइट पेपर’ ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पैदा होने वाले हर बच्चे पर ₹1.28 लाख का कर्ज का बोझ है। राज्य सरकार ने बिगड़ते वित्तीय हालात और बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
₹10 लाख करोड़ के कर्ज के बोझ तले दबा राज्य
तमिलनाडु के वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन द्वारा जारी किए गए व्हाइट पेपर में बताया गया है कि राज्य का सीधा कर्ज करीब ₹10 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह राज्य के कुल राजस्व का लगभग 28% है। सरकार का दावा है कि कर्ज में हुई यह हालिया बढ़ोतरी पिछले छह दशकों में दर्ज की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसके साथ ही, पिछले पांच वर्षों में तमिलनाडु का राजस्व घाटा ₹46,538 करोड़ से बढ़कर ₹78,324 करोड़ हो गया है।
विकास के बजाय रोजमर्रा के खर्चों में जा रहा है पैसा
इस रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि कर्ज ली गई रकम का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे के विकास में लगाने के बजाय रोजमर्रा के सरकारी खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल किया जा रहा है। हालात यह हैं कि राज्य सरकार द्वारा कमाए जाने वाले हर एक रुपये में से 22.8% हिस्सा सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाता है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि तमिलनाडु की कमाई और खर्च का यह अंतर कोई मामूली बात नहीं है, बल्कि राज्य का पूरा आर्थिक ढांचा ही इस घाटे के जाल में फंस चुका है।
अन्य राज्यों के मुकाबले तमिलनाडु की स्थिति गंभीर
व्हाइट पेपर में तमिलनाडु के कर्ज की तुलना देश के अन्य बड़े राज्यों से भी की गई है। आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु का कर्ज अनुपात 28.3% है जो बेहद ज्यादा है। इसकी तुलना में कर्नाटक का कर्ज अनुपात 23.4% है जो लगातार घट रहा है। वहीं महाराष्ट्र का कर्ज अनुपात 19.7% और गुजरात का 17.6% पर पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस दस्तावेज को सामने लाने का मकसद राज्य की वर्तमान वित्तीय चुनौतियों को उजागर करना और इसमें सुधार के लिए जरूरी कदम उठाना है।
विपक्ष का पलटवार: ‘यह व्हाइट पेपर नहीं, कोरा कागज है’
दूसरी तरफ विपक्ष ने इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व वित्त मंत्री थंगाम थेनारासु ने इस वित्तीय रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे व्हाइट पेपर के बजाय एक खाली या कोरा कागज करार दिया है। थेनारासु ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी प्रशासनिक विफलताओं और चुनावी वादों को पूरा न कर पाने की नाकामी से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह रिपोर्ट जारी की है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पहले ही राज्य के बजट में साफ की जा चुकी थी, इसलिए इस नए दस्तावेज की कोई जरूरत नहीं थी और वे जल्द ही इस रिपोर्ट के खिलाफ एक विस्तृत जवाब जारी कर जनता के सामने असली तथ्य रखेंगे।
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