पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तान के खिलाफ बगावती सुर तेज़ हो गये हैं। विरोधी आंदोलन में आज़ादी की मांग उठ रही है। रावलाकोट के ईदगाह मैदान में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में तीन सप्ताह से अधिक समय से हजारों लोग धरने पर बैठे हैं। 29 और 30 जून को भी प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर नारे लगाए कि “PoJK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है” और “Pakistani Forces Out”।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनकी 38 मांगों पर पाकिस्तान सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और अब आंदोलन राजनीतिक अधिकारों, स्वायत्तता और पाकिस्तान के कब्जे से आजादी की मांग का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप है कि पिछले दो सप्ताह से कई इलाकों में राशन और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित है। भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवीय आधार पर प्रदर्शनकारियों ने ध्यान देने की अपील की है।
पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर में आजादी की मांग
JAAC का आंदोलन शुरुआत में आटा, बिजली की बढ़ती कीमतों, आर्थिक संकट, शरणार्थी सीटों में आरक्षण और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन लगातार बढ़ते जनसमर्थन के बीच यह अब व्यापक राजनीतिक आंदोलन बन चुका है। रावलाकोट के ईदगाह मैदान में प्रदर्शनकारी लगातार पाकिस्तान विरोधी नारे लगा रहे हैं और खुद को पाकिस्तान के बजाय अलग राजनीतिक पहचान देने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक अधिकार, बेहतर प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
पाकिस्तान के खिलाफ महिलाओं-बच्चों ने भी बुलंद की आवाज़
22 जून को India Today की रिपोर्ट के अनुसार रावलाकोट के ईदगाह मैदान में 70,000 से अधिक प्रदर्शनकारी लगातार धरने पर बैठे थे। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं और स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। बच्चों के हाथों में “Pakistani Forces Out”, “We Want Basic Rights”, “Food is Blocked, Internet is Turned Off” और “We Want Free Education” जैसे पोस्टर देखे गए। रिपोर्ट के अनुसार JAAC नेतृत्व ने पाकिस्तान सरकार को 38 मांगों पर फैसला लेने के लिए समय सीमा दी थी और चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी नहीं होने पर बड़े पैमाने पर मुजफ्फराबाद मार्च निकाला जाएगा। खुफिया इनपुट के अनुसार आंदोलन के नेताओं ने पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी पर भी सवाल उठाए थे।
आंदोलन का दमन कर रही पाकिस्तानी फौज
इससे पहले 9 जून को India Today की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से जानकारी मिली थी कि 5 से 9 जून के बीच पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने JAAC आंदोलन पर व्यापक कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई में कई नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 19 बच्चों और 7 गर्भवती महिलाओं की भी जान गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि करीब 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई और निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इंटरनेट और संचार सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए और कई आंदोलनकारी नेताओं को हिरासत में लिया गया। उसी दौरान आंदोलन मुजफ्फरबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान, दादियाल, रावलकोट, सुधनोती और तत्तापानी सहित कई इलाकों तकत फैल गया था।
MEA ने उठाया मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले भी PoJK में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी रिपोर्टों पर चिंता जताई है। मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान अपनी विफलताओं और PoJK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए दुष्प्रचार फैला रहा है। MEA ने उम्मीद जताई थी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और दमनात्मक कार्रवाइयों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।
स्थिति अब भी तनावपूर्ण
रावलाकोट में धरना अभी भी जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी 38 मांगों पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। लगातार बढ़ती भीड़ और पाकिस्तान विरोधी नारों ने PoJK की स्थिति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
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