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WiFi Sensing: अगर आपने हाल में Pritam Pedro वेब सीरीज देखी है, तो उसके एक सीन ने आपको जरूर हैरान किया होगा। इस सीन में एक हैकर सिर्फ Wi-Fi राउटर की मदद से पता लगा लेता है कि कमरे में कौन कहां खड़ा है और किस तरफ चल रहा है।

यह बात किसी साइंस फिक्शन कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे की तकनीक पूरी तरह बनाई हुई नहीं है। दुनिया के कई रिसर्च सेंटर और टेक कंपनियां पिछले कुछ सालों से Wi-Fi Sensing नाम की तकनीक पर काम कर रही हैं। हालांकि, इसका इस्तेमाल करना वेब सीरीज में दिखाए गए तरीके जितना आसान नहीं है।

क्या है Wi-Fi Sensing?

घर में लगा Wi-Fi राउटर लगातार रेडियो वेव्स भेजता रहता है। ये वेव्स कमरे की दीवारों, फर्नीचर और इंसान के शरीर से टकराकर वापस लौटती हैं। जब कोई इंसान कमरे में चलता है या अपनी जगह बदलता है, तो Wi-Fi सिग्नल में भी बदलाव आने लगता है। रिसर्च में इन बदलावों से मिलने वाली जानकारी को Channel State Information यानी CSI कहा जाता है।

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AI इन सिग्नलों में हुए बदलावों को समझकर यह अंदाजा लगाने की कोशिश करता है कि कमरे में कोई मौजूद है या नहीं। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति किस तरफ जा रहा है या वह किस तरह खड़ा या बैठा है।

क्या यह कैमरे की तरह तस्वीर दिखाता है?

Wi-Fi Sensing को कई बार Wi-Fi की मदद से देखने वाली तकनीक कहा जाता है, लेकिन यह कैमरे की तरह किसी इंसान की साफ तस्वीर नहीं दिखाती। यह तकनीक सिर्फ Wi-Fi सिग्नल में होने वाले बदलावों को समझती है। इसके बाद AI की मदद से यह अंदाजा लगाया जाता है कि कमरे में कोई इंसान मौजूद है या नहीं, वह चल रहा है या रुका हुआ है और वह किस जगह पर हो सकता है।

कार्नेजी मेलन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने ऐसा सिस्टम दिखाया था, जो प्रॉब्लेम Wi-Fi राउटर के सिग्नलों से कमरे में मौजूद लोगों की जगह और उनके शरीर के आकार का अंदाजा लगा सकता था। जर्मनी के कार्ल्सरूए इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने भी दावा किया कि नए Wi-Fi राउटर से मिलने वाली जानकारी की मदद से लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा सकती है।

क्या कोई भी हैकर इसका इस्तेमाल कर सकता है?

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोई भी हैकर सिर्फ आपका Wi-Fi पासवर्ड मिलने के बाद आपके कमरे के अंदर की हलचल देख सकता है। अभी तक इस तकनीक से जुड़ी ज्यादातर जांच खास माहौल में की गई हैं। इसके लिए खास सॉफ्टवेयर, AI मॉडल, सिग्नल को समझने वाली तकनीक और कई बार अलग मशीनों की जरूरत पड़ती है।

इसलिए किसी आम Wi-Fi नेटवर्क को हैक करके तुरंत यह पता लगाना कि कोई इंसान कमरे में कहां बैठा है, फिलहाल आसान नहीं है।

अच्छे कामों में भी हो सकता है इस्तेमाल

इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ लोगों पर नजर रखने के लिए नहीं किया जा रहा है। इसकी मदद से बुजुर्गों की देखभाल, घर में किसी के गिरने का पता लगाने, बिजली बचाने, स्मार्ट होम सिस्टम चलाने और घर की सुरक्षा बेहतर करने पर भी काम हो रहा है। ऐसे सिस्टम कैमरा लगाए बिना यह पता लगा सकते हैं कि घर में कोई मौजूद है या नहीं।

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