हाल ही में हुए बांग्लादेश के आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उनकी जीत को बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान बांग्लादेश के सबसे पुराने और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक से आते हैं। उनके पिता ज़ियाउर रहमान बांग्लादेश के सातवें राष्ट्रपति रह चुके हैं, जबकि उनकी मां खालिदा जिया कई बार देश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और BNP की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती हैं।
तारिक रहमान लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं, लेकिन उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी जुड़ा रहा है। वर्ष 2002 के चिटगांव आर्म्स हॉल मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। बाद में 2007 में उनकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें इलाज के लिए यूनाइटेड किंगडम जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद वे करीब 17 वर्षों तक ब्रिटेन में रहे और इस दौरान बांग्लादेश वापस नहीं लौटे।
दिसंबर में अपने 17 साल के निर्वासन के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश लौटे। अब उनका प्रधानमंत्री बनना न केवल देश की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनावी भाषणों के दौरान उन्होंने कई बार कहा कि वे बांग्लादेश के सभी पड़ोसी और शक्तिशाली देशों के साथ संतुलित और अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश चुनाव के परिणाम सामने आते ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। उन्होंने भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस जीत को बांग्लादेश की जनता के तारिक रहमान पर विश्वास का प्रतीक बताया।
वहीं BNP के मुख्य समन्वयक इस्लाम खान ने समाचार एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस बात का सम्मान करती है कि भारत ने बांग्लादेश की जनता के लोकतांत्रिक फैसले को स्वीकार किया है।
हालांकि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बनने वाली BNP 2.0 सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाते है।
कैसा है BNP का भारत से रिश्ता?
BNP की कमान तारिक रहमान के हाथों में आने से पहले, इसकी कमान उनकी माता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के पास थी। लंबी बीमारी के चलते 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। ऐतिहासिक रूप से, नई दिल्ली और खालिदा ज़िया के बीच रिश्तों में हमेशा एक ‘ठंडापन’ रहा। भारत सरकार उन्हें सुरक्षा और रणनीतिक मोर्चों पर एक चुनौतीपूर्ण सहयोगी मानती थी।
शेख हसीना के कार्यकाल के विपरीत जिसे नई दिल्ली ने हमेशा अधिक विश्वसनीय और स्थिर माना- खालिदा ज़िया का दौर आपसी दूरी और सीमित संवाद के लिए जाना जाता था। हालांकि उन्होंने भारत से पूरी तरह नाता कभी नहीं तोड़ा, लेकिन उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंध केवल औपचारिक स्तर तक ही सिमट कर रह गए थे। यह शेख हसीना के दौर में देखी गई गहरी साझेदारी और प्रगाढ़ता से बिलकुल अलग था।
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