मिडिल ईस्ट में बढ़ते हुए तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे सभी की चिंताएं बढ़ गई हैं। लेकिन भारत को इसकी ज्यादा चिंता नहीं है क्योंकि भारत के पास पहले से ही कई दिनों के लिए कच्चे तेल के भंडार पड़े हैं।
मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ गई है। जहां एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बेस को अपना निशाना बना रहा है। ईरान कतर, दुबई, सऊदी अरब समेत अन्य देशों पर लगातार मिसाइल दाग रहा है। मिडिल ईस्ट में इस बढ़ी हुई जंग के बीच सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल को लेकर है। जंग शुरू होने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
आसमान छू रही कच्चे तेल की कीमतें
अकेले सोमवार को ही कच्चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी तक बढ़त देखी गई और अनुमान लगाया जा रहा है कि एक बैरल तेल की कीमत 100 डॉलर तक पहुंच सकती है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में महंगाई अपने चरम पर पहुंच जाएगी, साथ ही ग्लोबल इकोनॉमी को भी भारी नुकसान होगा।
भारत को नहीं है कच्चे तेल का संकट
इन बढ़ती हुई कच्चे तेल की कीमतों के बीच एक अच्छी खबर यह है कि भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं है। भारत के पास काफी ज्यादा मात्रा में कच्चे तेल का रिजर्व पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी इमरजेंसी हालात से निपटने के लिए भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल के रिजर्व हैं।
45 दिन का भंडार
भारत के ये रिजर्व एलपीजी और एलएनजी की मांग को 15 दिन तक पूरा कर सकते हैं। वहीं कच्चे तेल की बात करें तो यह रिजर्व 45 दिन तक चल सकते हैं। एक तरफ जहां दुनिया के सभी देश स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर चिंतित हैं, ऐसे में भारत के ये तेल भंडार भारत की स्थिति को मजबूत रखे हुए हैं।
इसके साथ ही अधिकारियों का कहना है कि अगर यह मार्ग ज्यादा समय तक बंद रहता है तो ऐसे में भारत अपनी घरेलू मांग को पूरी करने के लिए दूसरी जगहों से अपने लिए तेल और अन्य ऊर्जा संबंधित चीजें प्राप्त कर अपनी क्षमता को बरकरार रखेगा।
क्यों खास है यह मार्ग?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे जरूरी जलमार्गों में से एक है। ग्लोबल कच्चे तेल का लगभग 20-30% इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसके अलावा एलएनजी शिपमेंट का भी 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर जाता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने या प्रभावित होने से इसका सीधा असर दुनियाभर के तेल और गैस के व्यापार पर पड़ता है।
यूरोप में बढ़ी गैस की कीमतें
ईरान समेत मिडिल ईस्ट में बढ़ते जंग और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होने वाली सप्लाई के प्रभावित होने से ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके चलते यूरोपीय नेचुरल गैस की कीमतें लगभग 22 प्रतिशत बढ़ गई हैं। बता दें कि 2022 के गैस मार्केट उतार-चढ़ाव के बाद यह सबसे बड़ी बढ़त है। डर है कि युद्ध के चलते दूसरे एनर्जी शिपमेंट का रास्ता बदलना पड़ सकता है, जिससे शिपमेंट की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
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