अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान के गराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति और बढ़ते भू-राजनीतिक संकट के दौरान आए इस भूकंप ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। चिंता इसलिए क्योंकि कई लोग यह मान रहे हैं कि यह कोई नैचुरल भूकंप नहीं बल्कि परमाणु परीक्षण के होने वाली कंपन थी।
ईरान के फार्स प्रांत (Fars Province) में गराश (Gerash) शहर स्थित है जहां यह भूकंप आया है। दक्षिणी ईरान के लारेस्तान क्षेत्र में आने वाला यह शहर जाग्रोस फोल्ड थ्रस्ट बेल्ट का हिस्सा है, जो अरेबियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच होने वाली टक्कर के कारण बना है।
अपनी स्पेशल भौगोलिक स्थिति के कारण ईरान दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां गराश जैसे इलाकों में 4 से 5 मैग्निट्यूड के भूकंप आना एक सामान्य घटना मानी जाती है।
विशेषज्ञों ने परमाणु परीक्षण के दावों को किया खारिज
कई रिपोर्ट्स यह दावा कर रही थीं कि यह भूकंप प्राकृतिक नहीं है, बल्कि यह भूकंप ईरान के परमाणु परीक्षण के कारण आया था। लेकिन इन दावों को विशेषज्ञों ने खारिज कर दिया है। आजतक ने अपने रिपोर्ट में संडे गार्जियन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस भूकंप के पीछे परमाणु परीक्षण होने का कोई सबूत नहीं है।
पहले भी किए गए हैं ऐसे दावे
इससे पहले भी जब 2024 में ईरान में 4.5 तीव्रता का भूकंप आया था, उसको लेकर भी कई लोगों ने यह दावा किया था कि यह भूकंप परमाणु परीक्षण का नतीजा है। लेकिन उस समय भी सीटीबीटीओ (कम्प्रीहेंसिव टेस्ट बैन ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) के डेटा के अनुसार यह साबित हुआ था कि वह भूकंप भी प्राकृतिक था। ईरान भूकंप वाले क्षेत्र में आता है, ऐसे में वहां भूकंप आना आम बात है।
परमाणु परीक्षण पर कितनी तीव्रता का भूकंप आता है?
प्राकृतिक भूकंप और परमाणु परीक्षण से आने वाले भूकंप में कई तरह से अंतर होता है। दोनों की तरंगें और उनकी विशेषताएं अलग होती हैं।
परमाणु परीक्षण से आने वाला भूकंप विस्फोट की शक्ति पर निर्भर करता है। जैसे- मान लीजिए अगर 5 मेगाटन का परीक्षण हो तो वह 6.9 तीव्रता का भूकंप ला सकता है। इसके साथ ही परीक्षण की गहराई भी भूकंप की तीव्रता पर असर डालती है।
अक्सर परमाणु परीक्षण को गुप्त रखने के लिए उसे जमीन के नीचे गहराई में किया जाता है। इसके लिए स्केल्ड डेप्थ ऑफ बरीअल (SDBO) 100 मीटर प्रति किलोटन से ज्यादा होना चाहिए ताकि परमाणु विस्फोट से निकलने वाला रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर न फैले।सामान्यतः परमाणु बम की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5 या 6 से ज्यादा होती है क्योंकि छोटे परीक्षणों से कम तीव्रता आती है।
ईरान में आए भूकंप की तीव्रता 4.3 थी, जो कि परमाणु परीक्षण से आने वाले भूकंप से काफी कम है। इसके साथ ही सीटीबीटीओ के डेटा के अनुसार परमाणु विस्फोट से निकलने वाली तरंगें विस्फोटक होती हैं, जबकि प्राकृतिक भूकंप की तरंगें टेक्टोनिक होती हैं।
बर्कले सिस्मोलॉजी लैब के मुताबिक जब उत्तर कोरिया ने 2016 में परमाणु परीक्षण किया था, तब उससे 5.1 तीव्रता का भूकंप आया था। परीक्षण अगर कम गहराई पर हो तो उसकी तीव्रता ज्यादा होती है और रेडिएशन फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
परमाणु परीक्षण से रिक्टर स्केल पर 4.5 से 7+ तीव्रता का भूकंप आता है
- छोटा टेस्ट (1-5 किलोटन): 4.5-5.5
- मध्यम (20-50 किलोटन): 5.5-6.5
- बड़ा (1 मेगाटन+): 6.5-7+
ईरान ने बनाए 25 घंटों में 10 परमाणु बम?
ईरान द्वारा ऐसा कोई दावा सीधे तौर पर नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ईरान ने माना है कि उसके पास 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम के 460 किलोग्राम हैं, जो कि 11 परमाणु बम बनाने के लिए काफी हो सकते हैं।
बीबीसी की रिपोर्ट की मानें तो ईरान परमाणु बम बनाने के काफी करीब पहुंच चुका है, हालांकि ईरान ने अभी बम बनाया नहीं है। वहीं ईरान के वरिष्ठ नेता करीबी मोहम्मद जवाद लारिजानी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान 24 घंटों में नया परमाणु हथियार विकसित कर सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार ईरान के पास पर्याप्त मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम है और वह चाहे तो कुछ हफ्तों में पहला बम बना सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार ईरान 6 महीने में 10 परमाणु बम बना सकता है।
क्या ईरान को मिल रही है परमाणु तकनीक?
सीएसआईएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में रूस ने ईरान को एनरिच्ड यूरेनियम देने और ईरानी वैज्ञानिकों को रिसर्च सुविधाएं देने जैसे काम किए हैं। वहीं उत्तर कोरिया ने ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल टेक्नोलॉजी साझा की है। हालांकि परमाणु तकनीक साझा करने के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं।
इसके अलावा अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने ईरान को मिसाइल और ड्यूल यूज सामान जैसी चीजें दी हैं। ईरान, रूस, चीन और उत्तर कोरिया का एक्सिस अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है, लेकिन सीधे तौर पर परमाणु तकनीक साझा करने के सबूत नहीं हैं।
ईरान के पास अगर परमाणु बम होते तो यह युद्ध और भी खतरनाक हो जाता। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान में रेजीम बदलना मुश्किल है। परमाणु हथियार होने से क्षेत्र में परमाणु दौड़ शुरू हो सकती है।
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