LPG vs LNG vs CNG vs PNG: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई काफी प्रभावित हुई है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के बाद भारत समेत कई देशों में गैस की सप्लाई कम हो गई है और गैस के दाम भी बढ़ गए हैं। देश की बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इसके चलते एलपीजी जैसी गैस को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
पिछले कुछ दिनों से आपने अलग-अलग जगहों पर कभी एलपीजी (LPG), कभी सीएनजी (CNG), कभी पीएनजी (PNG) और कभी एलएनजी (LNG) का नाम जरूर सुना होगा। इस आर्टिकल में हम आपको इन्हीं के बीच अंतर बताएंगे की किस गैस का कहां इस्तेमाल होता है और इनके बीच क्या अंतर है।
एलपीजी (LPG), सीएनजी (CNG), पीएनजी (PNG), एलएनजी (LNG) इन सभी का नाम सुनने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन सभी गैसों का इस्तेमाल अलग-अलग कामों में किया जाता है। एक साथ मिलकर ये सभी गैस भारत की गैस इकोनॉमी का एक जरूरी हिस्सा बन जाती हैं।
एलपीजी: हम सबकी रसोई में होता है इस्तेमाल
एलपीजी से शायद ज्यादातर लोग वाकिफ होंगे। करोड़ों देशवासियों की रसोई के लिए यह उनकी लाइफलाइन है। इसका पूरा नाम लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (Liquefied Petroleum Gas) है।
कच्चे तेल की रिफाइनिंग और नैचुरल गैस की प्रोसेसिंग के दौरान एलपीजी का प्रोडक्शन होता है। इसमें प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसें होती हैं जिन्हें लिक्विड फॉर्म में सिलेंडरों में भरा जाता है।
सरकारी योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने एलपीजी गैस कनेक्शन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में काफी मदद की है। एलपीजी को सिलेंडर में भरकर स्टोर किया जा सकता है और आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।
सीएनजी: वाहनों में होता है इस्तेमाल
जिस तरह से एलपीजी भारतीय रसोई की लाइफलाइन है, वैसे ही सीएनजी वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है। सीएनजी का पूरा नाम कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (Compressed Natural Gas) है। सीएनजी गैस को काफी हाई प्रेशर पर कंप्रेस किया जाता है, जिसके बाद इसे भी सिलेंडरों में भरकर स्टोर कर दिया जाता है। इसका ज्यादातर इस्तेमाल गाड़ियों में ईंधन के रूप में किया जाता है।
पेट्रोल और डीजल की तुलना में सीएनजी काफी कम प्रदूषण फैलाती है। इसी कारण से सीएनजी वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी भी हो रही है।
पीएनजी: पाइपलाइन से आने वाली गैस
पाइप्ड नैचुरल गैस (Piped Natural Gas) या पीएनजी कोई अलग गैस नहीं है बल्कि इसमें पाइपलाइन के जरिए नैचुरल गैस को घरों, रेस्टोरेंट और उद्योगों तक डिलीवर किया जाता है।
यह बिल्कुल पानी के कनेक्शन की तरह होता है जिसमें गैस अंडरग्राउंड पाइपलाइन से होकर घरों तक पहुंचती है। जितनी गैस का इस्तेमाल किया जाता है उसके उसी के अनुसार बिल भरना पड़ता है।
एलएनजी: पावर प्लांट्स को ऊर्जा देता है
एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी को सीधे कस्टमर इस्तेमाल करते हैं, वहीं लिक्विफाइड नैचुरल गैस (Liquefied Natural Gas) एलएनजी का इस्तेमाल इन तीनों से अलग है। इस गैस को 162 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा कर लिक्विड फॉर्म में बदल दिया जाता है, जिससे इसे जहाजों के जरिए ट्रांसपोर्ट करना आसान हो जाता है।
भारत कई देशों से एलएनजी इंपोर्ट करता है। एक बार यह गैस भारत के कोस्टल टर्मिनल पर पहुंच जाती है तब इसे फिर से गैस फॉर्म में बदलकर इंडस्ट्री, पावर प्लांट्स और शहरों के गैस नेटवर्क तक भेज दिया जाता है। एलएनजी का इस्तेमाल देश के गैस सप्लाई सिस्टम में होता है।
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