Petrol-Diesel Prices: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार रूकावट ने दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा दिया है। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक लगभग स्थिर बनी हुई हैं। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन टिकती नहीं दिख रही।
15 मई से पहले बढ़ सकते हैं दाम
बिजनेस टुडे को सूत्रों ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियां लगातार भारी घाटा झेल रही हैं और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी हो सकती है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है।
होर्मुज संकट से बढ़ा दबाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई गुजरती है। पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते यह रास्ता कई हफ्तों से प्रभावित है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बड़ा संकट पैदा हो गया है।
दुनिया भर में महंगा हुआ पेट्रोल
दुनिया के कई देशों में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। हांगकांग में पेट्रोल करीब 295 रुपये प्रति लीटर, सिंगापुर में 240 रुपये, नीदरलैंड्स में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं भारत के कई शहरों में पेट्रोल अब भी करीब 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास है।
कई देशों ने उठाए आपात कदम
तेल संकट से निपटने के लिए कई देशों ने सख्त कदम उठाए हैं। बांग्लादेश ने ईंधन राशनिंग लागू की है, श्रीलंका ने चार दिन का वर्क वीक शुरू किया है, पाकिस्तान ने सरकारी दफ्तरों के कामकाजी दिन घटाए हैं, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों बाद पहली बार फ्यूल प्राइस कैप लागू किया है। भारत में हालांकि न तो ईंधन की कमी देखने को मिली और न ही लंबी कतारें या राशनिंग की नौबत आई।
सरकार और OMCs ने ऐसे संभाला संकट
सरकार और इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए। घरेलू LPG उत्पादन 36 हजार टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया। साथ ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई ताकि उपभोक्ताओं पर बोझ कम रहे।
इंडस्ट्री अनुमान के मुताबिक चरम कीमतों के दौरान सरकार और तेल कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का बोझ उठा रही थीं।
रूस समेत कई देशों से बढ़ाया आयात
भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर सप्लाई स्थिर रखने की कोशिश की।रिफाइनरियां 100 फीसदी से ज्यादा क्षमता पर काम कर रही हैं ताकि बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे।
पिछले एक दशक में देश के ऊर्जा ढांचे के विस्तार का भी फायदा मिला। 2014 के बाद LPG टर्मिनलों की संख्या दोगुनी हुई, कच्चे तेल के स्रोत 27 देशों से बढ़कर 40 देशों तक पहुंचे और एथेनॉल ब्लेंडिंग 1.5 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच गई।
बढ़ता जा रहा दबाव
हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध जारी रहने और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बने रहने से सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना तेज हो गई है।
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