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Hantavirus Explained: इन दिनों एक डच क्रूज शिप MV Hondius पर फैले हंतावायरस (Hantavirus) संक्रमण ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। जहाज पर 23 देशों के 140 से ज्यादा यात्री और क्रू मौजूद थे। इस आउटब्रेक में अब तक 3 लोगों की मौत जुड़ी बताई गई है। शुरुआत में कई बंदरगाहों ने जहाज को प्रवेश देने से मना कर दिया था। बाद में World Health Organization (WHO) को बीच में आना पड़ा और उसने विशेषज्ञों की टीम भेजी।

इस घटना के बाद लोग हंतावायरस को लेकर डर और सवाल दोनों पूछ रहे हैं। आखिर ये वायरस क्या है? क्या ये COVID जैसा है? क्या भारत में भी इसका खतरा है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं।

Hantavirus क्या है?

हंतावायरस (Hantavirus) एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों और दूसरे कृन्तकों (rodents) में पाया जाता है। यह इंसानों में जानवरों के जरिए फैलता है, इसलिए इसे जूनोटिक वायरस कहा जाता है।

संक्रमित चूहों के पेशाब, मल और लार में यह वायरस मौजूद रहता है। जब सूखे मल या धूल के कण हवा में उड़ते हैं और इंसान उन्हें सांस के जरिए अंदर ले लेता है, तब संक्रमण हो सकता है।

यह संक्रमण अक्सर इन जगहों पर ज्यादा जोखिम पैदा करता है:

  • गोदाम
  • बेसमेंट
  • खेत और खलिहान
  • जंगल वाले इलाके
  • बंद और कम हवादार कमरे
  • ऐसी जगहें जहां चूहों की संख्या ज्यादा हो

कम मामलों में चूहे के काटने से भी संक्रमण हो सकता है।

शरीर पर कैसे असर करता है?

शरीर में जाने के बाद हंतावायरस खून की नसों की अंदरूनी परत पर हमला करता है। इससे शरीर में सूजन और खून की नसों से तरल रिसाव बढ़ जाता है।

गंभीर मामलों में मरीज के फेफड़े प्रभावित हो सकते हैं और सांस लेने में दिक्कत बढ़कर रेस्पिरेटरी फेलियर तक पहुंच सकती है। कुछ प्रकार में यह किडनी पर असर डालता है और हेमोरेजिक फीवर जैसी स्थिति बना सकता है।

इसके लक्षण क्या हैं?

इस वायरस के शुरुआती लक्षण बिल्कुल सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं, इसलिए पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

मुख्य लक्षण की बात करें तो इसमें:

  • तेज बुखार
  • थकान
  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द
  • सिरदर्द
  • उल्टी और मतली
  • दस्त
  • पेट दर्द
  • जोड़ों में दर्द

गंभीर मामलों में:

  • सांस लेने में दिक्कत
  • फेफड़ों में पानी भरना
  • किडनी खराब होना
  • प्लेटलेट्स कम होना

क्या यह COVID जैसा है?

All India Institute of Medical Sciences के प्रोफेसर डॉ. पुनीत मिश्रा के मुताबिक, Hantavirus और COVID को एक जैसा मानना गलत होगा।

उन्होंने बताया कि COVID एक नया वायरस था जो इंसान से इंसान में तेजी से हवा के जरिए फैलता था। लेकिन हंतावायरस का मुख्य स्रोत चूहे और rodents हैं।

हालांकि Andes virus नाम का एक स्ट्रेन सीमित रूप से इंसानों के बीच फैल सकता है, लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में देखा गया है। यानी यह COVID की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं माना जाता।

बचाव कैसे करें?

क्योंकि अभी तक इसका कोई व्यापक वैक्सीन या पक्का इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे जरूरी है।

सावधानियां:

  • चूहों वाले इलाकों की सफाई करते समय मास्क और ग्लव्स पहनें
  • बंद कमरों को पहले अच्छी तरह हवादार बनाएं
  • चूहों के मल या पेशाब को सीधे हाथ से न छुएं
  • घर और गोदामों में rodent control रखें
  • खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें

भारत में सबसे बड़ी चिंता क्या है?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सबसे बड़ी समस्या जागरूकता और टेस्टिंग की कमी है। अक्सर इसके लक्षण डेंगू, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस या वायरल फीवर जैसे लगते हैं। इसलिए कई मामले गलत बीमारी मानकर छूट सकते हैं। अधिकांश अस्पतालों में हंतावायरस की नियमित जांच नहीं होती और स्पेशल लैब सुविधाएं भी सीमित हैं।

क्या भारत में भी Hantavirus है?

भारत Andes virus वाला हाई-रिस्क देश नहीं माना जाता और अभी तक इस आउटब्रेक से जुड़ा कोई भारतीय मामला सामने नहीं आया है।

लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि भारत में Hantavirus जैसे संक्रमण पहले भी पाए जा चुके हैं। तमिलनाडु में कई रिसर्च में गोदाम कर्मचारी, कृंतक पकड़ने वाले और कुछ आदिवासी समुदायों में संक्रमण के संकेत मिले थे। भारत में थोट्टापलयम वायरस नाम का एक स्ट्रेन भी मिला था, जिसे 1964 में तमिलनाडु में पहचाना गया था।

MV Hondius जहाज पर क्या हुआ था?

WHO के मुताबिक, MV Hondius नाम का डच एक्सपेडिशन क्रूज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के Ushuaia से निकला था। यह 24 दिन की पोलर यात्रा पर था।

यात्रा के दौरान एक यात्री को बुखार, पेट दर्द और दस्त की शिकायत हुई। बाद में उसकी जहाज पर ही मौत हो गई। दूसरा यात्री बाद में दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के बाद अस्पताल में भर्ती हुआ और उसकी भी मौत हो गई। तीसरी मौत भी इसी आउटब्रेक से जुड़ी बताई गई।

अब तक 8 मामलों की पहचान हो चुकी है, जिनमें कई लैब से कन्फर्म हुए हैं। WHO का कहना है कि जहाज पर लंबे समय तक बंद माहौल और करीब संपर्क संक्रमण बढ़ने की वजह हो सकते हैं।

Andes Virus इतना अलग क्यों माना जाता है?

दुनिया के ज्यादातर Hantavirus केवल चूहों से इंसानों में फैलते हैं। लेकिन Andes virus एकमात्र ऐसा Hantavirus माना जाता है जिसमें सीमित ह्यूम टू ह्यूम ट्रांसमिशन देखा गया है।

यह वायरस पहली बार 1995 में अर्जेंटीना में पहचाना गया था। पहले भी इसके मामले परिवार के सदस्यों, हेल्थकेयर वर्कर्स और लंबे समय तक करीब रहने वाले लोगों में देखे गए हैं। इसी वजह से क्रूज शिप वाला मामला दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

WHO ने क्या कहा?

WHO का कहना है कि यह घटना गंभीर जरूर है, लेकिन फिलहाल इसे वैश्विक महामारी का खतरा नहीं माना जा रहा। हालांकि Andes virus का इनक्यूबेशन पीरियड 6 हफ्तों तक हो सकता है, इसलिए आने वाले दिनों में कुछ और मामले सामने आ सकते हैं।

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