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CBSE के देशव्यापी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आंसर शीट की स्कैनिंग और डिजिटल इवैल्यूएशन से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट में हैदराबाद की Coempt Eduteck Pvt Ltd ने Tata Consultancy Services (TCS) जैसी दिग्गज कंपनी को पीछे छोड़कर ठेका हासिल किया।

अब टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी इवैल्यूएशन और कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यह प्रोजेक्ट CBSE की नई डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम का हिस्सा है, जिसके तहत लगभग 99 लाख Class XII आंसर शीट की स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन जांच की जानी थी।

तकनीकी इवैल्यूएशन में मामूली बढ़त से आगे निकली Coempt

टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक तकनीकी इवैल्यूएशन में Coempt Eduteck को 100 में से 91 अंक मिले, जबकि TCS को 89 अंक दिए गए।

दोनों कंपनियां कई मानकों पर लगभग बराबरी पर थीं, जिनमें सर्टिफिकेशन, मैनपावर, सिक्योरिटी कंप्लायंस, डिजास्टर रिकवरी सिस्टम और टेक्निकल आर्किटेक्चर शामिल थे।

लेकिन असली फर्क ‘पिछले एक्सपीरियंस’ वाले सेक्शन में आया। यह कैटेगरी विशेष रूप से डिजिटल इवैल्यूएशन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी थी। Coempt को यहां पूरे अंक मिले, जबकि TCS को शून्य अंक दिए गए।

हालांकि TCS ने तकनीकी प्रेजेंटेशन और लाइव डेमो में बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन एक्सपीरियंस कैटेगरी में पिछड़ने से उसका टोटल स्कोर नीचे रह गया।

वित्तीय बोली में TCS से 566 करोड़ रुपये कम ऑफर

तकनीकी इवैल्यूएशन के बाद वित्तीय बोली में दोनों कंपनियों के बीच भारी अंतर देखने को मिला। Coempt ने हर आंसर शीट लगभग 24.8 से 25.7 रुपये की दर से बोली लगाई, जबकि TCS ने 53 से 65 रुपये प्रति बुकलेट के बीच कीमतें कोट कीं।

इस हिसाब से Coempt की कुल बोली करीब 384.6 करोड़ रुपये रही, जबकि TCS की बोली लगभग 951.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यानी दोनों के बीच करीब 566 करोड़ रुपये का अंतर था।

CBSE ने इस टेंडर में Quality and Cost Based Selection (QCBS) मॉडल अपनाया था, जिसमें तकनीकी स्कोर को 70% और वित्तीय बोली को 30% वेटेज दिया गया।

Kannur University ने Coempt को किया डिस्क्वालिफाई

इसी बीच Coempt Eduteck का नाम एक दूसरे विवाद में भी सामने आया है। केरल की Kannur University ने हाल ही में कंपनी को एक समान डिजिटल मूल्यांकन प्रोजेक्ट के टेंडर से बाहर कर दिया था। यूनिवर्सिटी की टेंडर समिति ने पाया कि कंपनी ने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी।

दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी ने ‘क्लीन ट्रैक रिकॉर्ड’ का अनिवार्य घोषणा पत्र जमा किया था और कहा था कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक या सिविल मामला लंबित नहीं है। 

CBSE की डिजिटल इवैल्यूएशन व्यवस्था पर बढ़ी निगरानी

यह मामला इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि Coempt फिलहाल CBSE के सबसे संवेदनशील कार्यों में से एक आंसर शीट की डिजिटाइजेशन और ऑन-स्क्रीन इवैल्यूएशन को संभाल रही है।

रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2021 से अब तक कंपनी ने 52 सरकारी टेंडरों में हिस्सा लिया है, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 129.5 करोड़ रुपये रही। इनमें से कंपनी को 12 कॉन्ट्रैक्ट मिले, जिनकी कुल कीमत करीब 75.5 करोड़ रुपये थी।

इनमें भी महाराष्ट्र का लगभग 61 करोड़ रुपये का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट सबसे प्रमुख माना जाता है। इसके अलावा कंपनी को 5 करोड़ रुपये से ऊपर के बहुत कम प्रोजेक्ट मिले हैं।

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