अगर आपकी कार या बाइक E20 फ्यूल पर चलती है तो आपके मन में भी यह सवाल जरूर होगा कि अगर भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% से बढ़ाकर 22%, 25%, 27% या 30% कर दी गई, तो आपके वाहन का क्या होगा?
दरअसल, सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में मई महीने में E22, E25, E27 और E30 जैसे नए एथेनॉल-पेट्रोल कॉम्बिनेशन के लिए फ्यूल स्टैंडर्ड्स को मंजूरी दी गई। इसका मकसद कच्चे तेल के इंपोर्ट को कम करना, देश की एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाना और पॉल्यूशन घटाना है।
हाल ही में मारुति सुजुकी ने WagonR Flex Fuel पेश की है, जो E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल कॉम्बिनेशन पर चल सकती है। वहीं Hero MotoCorp ने Splendor+ और HF Deluxe के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन लॉन्च किए हैं। इससे साफ है कि ऑटो कंपनियां अब ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मौजूदा E20 वाहन का क्या होगा?
भारत में बिकने वाली ज्यादातर नई गाड़ियां E20 फ्यूल के लिए डिजाइन की गई हैं। यानी ये 20% तक एथेनॉल वाले पेट्रोल पर सुरक्षित रूप से चल सकती हैं।
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अगर एथेनॉल की मात्रा इससे ज्यादा हो जाती है तो कुछ वाहनों में लंबे समय के बाद दिक्कतें आ सकती हैं। अधिक एथेनॉल की वजह से फ्यूल पंप, इंजेक्टर, रबर सील, गैस्केट और दूसरे फ्यूल सिस्टम पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं। इससे माइलेज, परफॉर्मेंस और इंजन की लाइफ पर भी असर पड़ सकता है।
क्या E20 गाड़ियों को अपग्रेड किया जा सकता है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीकी रूप से कन्वर्जन किट के जरिए कुछ E20 वाहनों को E22, E25, E27 या E30 जैसे फ्यूल पर चलाने के लिए तैयार किया जा सकता है। इसके लिए ECU री-कैलिब्रेशन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम में बदलाव और कुछ पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं।
हालांकि यह हर गाड़ी में संभव नहीं होगा और इसके लिए कंपनी की मंजूरी और टेस्टिंग जरूरी होगी। वहीं E20 वाहन को सीधे E85 पर चलाने लायक बनाना काफी मुश्किल और महंगा काम है। इसके लिए फ्यूल लाइन, फ्यूल टैंक, इंजेक्टर, पंप और इंजन सॉफ्टवेयर तक बदलना पड़ सकता है।
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क्या फ्यूल एडिटिव्स मदद करेंगे?
फ्यूल एडिटिव्स एक खास केमिकल तरल पदार्थ होते हैं जिन्हें पेट्रोल या डीजल की गुणवत्ता और इंजन के प्रोसेस को बेहतर बनाने के लिए फ्यूल टैंक में मिलाया जाता है। ये इंजन से कार्बन जमाव साफ करते हैं, माइलेज बढ़ाते हैं और फ्यूल सिस्टम को सेफ रखने में योगदान देते हैं।
फ्यूल एडिटिव्स सिर्फ कुछ छोटी-मोटी समस्याओं को कम कर सकते हैं, लेकिन वे किसी E20 गाड़ी को E85 या ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल के लिए तैयार नहीं कर सकते। असली चुनौती फ्यूल सिस्टम और इंजन की डिजाइन से जुड़ी है।
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