बिजनेस टुडे इंडिया के मोस्ट सस्टेनेबल कंपनीज समिट एंड अवॉर्ड्स में आयोजित ‘द इको ड्राइव’ सत्र में हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ हर्षवर्धन चितले ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी अब सिर्फ फैक्ट्री चलाने तक सीमित नहीं रह सकती। कंपनियों को ऐसे प्रोडक्ट बनाने होंगे जो अपने पूरे इस्तेमाल करने के साइकल के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव को कम करें।
चितले का मानना है कि भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर को अंत में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ना होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव रातोंरात संभव नहीं है। ऐसे में निकट भविष्य में कार्बन एमिशन कम करने के लिए बायोफ्यूल सबसे प्रभावी ऑप्शन में से एक है।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर बढ़ा फोकस
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लेकर कंज्यूमर्स की चिंताओं पर चितले ने कहा कि हीरो मोटोकॉर्प के नए मॉडल इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे पारंपरिक पेट्रोल और उच्च इथेनॉल मिश्रण दोनों पर आसानी से चल सकें। उन्होंने बताया कि वाहन का इंजन खुद ही इथेनॉल की मात्रा पहचान लेता है और उसी के अनुसार परफॉर्म करेगा।
लागत को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल की कीमत समान पेट्रोल इंजन वाले वाहनों की तुलना में केवल 3-4% अधिक है। लेकिन उत्पादन बढ़ने और तकनीक के व्यापक इस्तेमाल के साथ यह अंतर खत्म हो जाएगा।
चितले ने ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में एक से अधिक फ्यूल ऑप्शन साथ-साथ मौजूद रहेंगे। उनके मुताबिक भारत जैसे बड़े और डायवर्सिफाइड मार्केट के लिए किसी एक सॉल्यूशन पर निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं होगा। देश को इलेक्ट्रिक वाहनों, बायोफ्यूल और अन्य ऑप्शनल तकनीकों के मिश्रण की जरूरत होगी।
सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों पर आगे बढ़ रही कंपनी
चितले ने बताया कि हीरो मोटोकॉर्प ने 2030 तक कार्बन न्यूट्रल बनने, वॉटर पॉजिटिव बनने, लैंडफिल में जाने वाले कचरे को खत्म करने और उत्पादों की रीसाइक्लेबिलिटी बढ़ाने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए थे।
उन्होंने कहा कि इस सफर के छह साल बाद कंपनी अपने लक्ष्यों की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है। कंपनी अपने आधार स्तर की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 45% की कमी ला चुकी है।
पानी बचाने में भी बड़ी उपलब्धि
चितले के मुताबिक हीरो मोटोकॉर्प अब 500% वॉटर पॉजिटिव है। यानी कंपनी जितना पानी इस्तेमाल करती है, उससे पांच गुना अधिक पानी का पुनर्भरण करती है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी के कई प्लांट राजस्थान जैसे जल-संकट वाले क्षेत्रों में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रयासों का असर आसपास के समुदायों में भी दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा कंपनी ने उत्पाद रीसाइक्लेबिलिटी को 95% तक पहुंचा दिया है, जो ऑटोमोबाइल उद्योग के AIS 129 मानक में निर्धारित 80% आवश्यकता से काफी अधिक है।
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