Current Account Surplus: भारत का करेंट अकाउंट सरप्लस (Current Account Surplus) जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में घटकर 7.1 अरब डॉलर रह गया। एक साल पहले समान अवधि में यह 13.7 अरब डॉलर था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी और मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Merchandise Trade Deficit) के विस्तार ने सर्विस के निर्यात और प्रवासी भारतीयों से मिलने वाली रकम (Remittances) में हुई बढ़ोतरी के पॉजिटिव असर को पीछे छोड़ दिया। जीडीपी के रेश्यो में करेंट अकाउंट सरप्लस 1.4% से घटकर 0.7% रह गया है।
क्या होता है करेंट अकाउंट सरप्लस?
करेंट अकाउंट सरप्लस (Current Account Surplus) का मतलब है कि किसी देश को विदेशों से जितना पैसा मिल रहा है, वह विदेशों को किए गए भुगतान से ज्यादा है।
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आसान शब्दों में कहें तो जब किसी देश का निर्यात (Exports) उसके आयात (Imports) से ज्यादा होता है और साथ ही विदेशों से मिलने वाली अन्य इनकम (जैसे सेवाओं का निर्यात, निवेश से आय, विदेश में काम कर रहे लोगों द्वारा भेजा गया पैसा) भी मजबूत रहती है, तो करेंट अकाउंट में सरप्लस बनता है।
सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव
एक साल पहले की तुलना में चालू खाते के सरप्लस में कमी की सबसे बड़ी वजह मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का बढ़ना रहा। यह घाटा जनवरी-मार्च 2025 के 59.3 अरब डॉलर से बढ़कर जनवरी-मार्च 2026 में 83.4 अरब डॉलर हो गया।
इस बढ़ोतरी में गैर-मौद्रिक (Non-Monetary) सोने के आयात की बड़ी भूमिका रही। सोने के आयात पर खर्च 9.5 अरब डॉलर से बढ़कर 22.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जिससे चालू खाते पर 13.1 अरब डॉलर का अतिरिक्त दबाव पड़ा। वहीं सामान्य वस्तुओं के व्यापार संतुलन में भी गिरावट आई। इस दौरान निर्यात 3.7 अरब डॉलर घटकर 112.6 अरब डॉलर रह गया, जबकि आयात 7.7 अरब डॉलर बढ़कर 174 अरब डॉलर पहुंच गया।
पिछली तिमाही की तुलना में मजबूत सुधार
हालांकि, अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के मुकाबले तस्वीर बेहतर रही। उस तिमाही में भारत का चालू खाता 15.5 अरब डॉलर के घाटे में था, जो जनवरी-मार्च 2026 में 7.1 अरब डॉलर के अधिशेष में बदल गया।
इस सुधार की मुख्य वजह वस्तु व्यापार घाटे में कमी रही। घाटा 95.9 अरब डॉलर से घटकर 83.4 अरब डॉलर पर आ गया, जिससे चालू खाते में 22.6 अरब डॉलर का सुधार दर्ज हुआ।
सर्विस और रेमिटेंस से मिला सहारा
जनवरी-मार्च 2026 में Net Services Receipts बढ़कर 60.4 अरब डॉलर हो गईं, जो एक साल पहले 53.3 अरब डॉलर थीं। कंप्यूटर सेवाओं में नेट प्राप्तियां 47.1 अरब डॉलर तक पहुंच गईं, जबकि प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग सेवाओं का सरप्लस बढ़कर 19.7 अरब डॉलर हो गया।
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प्रवासी भारतीयों से आने वाली पर्सनल ट्रांसफर प्राप्तियां भी 33.9 अरब डॉलर से बढ़कर 43.5 अरब डॉलर पहुंच गईं। इससे सेकेंडरी इनकम खाते में शुद्ध आय बढ़कर 41.3 अरब डॉलर हो गई।
FDI बढ़ा, लेकिन FPI निकासी तेज
वित्तीय खाते में फॉरेंन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट (FDI) का नेट फ्लो बढ़कर 4.2 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले सिर्फ 0.4 अरब डॉलर था। दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) से 12 अरब डॉलर की नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5.9 अरब डॉलर था।
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