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Rajesh Exports Share Price: नियामक जांच का सामना कर रही ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (Rajesh Exports) के शेयरों में शुक्रवार को भी गिरावट जारी रही। कंपनी का शेयर लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरा और 5 प्रतिशत टूटकर 77.05 रुपये के एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले सात कारोबारी दिनों में शेयर में कुल 29.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

सेबी के अंतरिम आदेश के बाद कंपनी ने जारी किया स्पष्टीकरण

पिछले हफ्ते कंपनी ने सेबी के अंतरिम आदेश को लेकर पैदा हुई कुछ ‘गलत धारणाओं’ पर नया स्पष्टीकरण जारी किया। यह स्पष्टीकरण उस अंतरिम आदेश के बाद आया, जिसमें सेबी ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने पांच साल की अवधि में अपने राजस्व के एक बड़े हिस्से को गलत तरीके से पेश किया और जरूरी मंजूरियों व खुलासों के बिना कंपनी के फंड का इस्तेमाल किया।

कंपनी ने रखा अपना पक्ष

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में राजेश एक्सपोर्ट्स ने 10 प्वाइंट्स के जरिए अपना पक्ष रखा। कंपनी ने कहा कि वह पूरी तरह कर्ज मुक्त है और अपने कारोबार के लिए किसी बाहरी फंडिंग पर निर्भर नहीं है।

कंपनी के मुताबिक, 1995 में 10 करोड़ रुपये के आईपीओ के अलावा उसने कभी किसी सार्वजनिक पेशकश के जरिए पैसा नहीं जुटाया। साथ ही, कंपनी ने कभी किसी घरेलू संस्था को इक्विटी प्लेसमेंट भी नहीं किया है।

राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा कि उसने कभी गलत रिपोर्टिंग नहीं की है और उसके सभी वित्तीय आंकड़े, राजस्व सहित, सही और वास्तविक हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि सेबी का आदेश केवल एक अंतरिम आदेश है और इसमें किसी भी मामले पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

कंपनी का दावा है कि उसका कोई भी कर्मचारी या अधिकारी किसी तरह के गलत जानकारी देने में शामिल नहीं रहा है।

कंपनी ने कहा कि उसके राजस्व को लेकर सबसे ज्यादा गलतफहमी पैदा हुई है। राजेश एक्सपोर्ट्स के अनुसार, उसके कंसो फाइनेंशियल डिटेल्स में दिखाया गया बड़ा राजस्व मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड स्थित उसकी सहायक कंपनी वालकैम्बी से आता है।

कंपनी का कहना है कि वालकैम्बी दुनिया की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित सोना रिफाइनिंग कंपनियों में से एक है, जो दुनिया भर के बड़े बैंकों, केंद्रीय बैंकों और प्रमुख सोना कारोबारियों को सोने की सिल्लियों का शोधन और बिक्री करती है।

राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा कि घोटाले, धोखाधड़ी, राजस्व में हेरफेर और एलआईसी को शेयरों की बिक्री से जुड़ी कुछ मीडिया रिपोर्टें और सोशल मीडिया पोस्ट पूरी तरह गलत, अनुचित और अटकलों पर आधारित हैं। कंपनी ने इन सभी दावों को खारिज किया है।

कंपनी ने कहा कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ कारोबार करती है और देश व वैश्विक अर्थव्यवस्था में पॉजिटिव योगदान दे रही है।

सेबी ने क्या आरोप लगाए हैं?

अपने अंतरिम आदेश में सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और इसके संस्थापक एवं कार्यकारी चेयरमैन राजेश मेहता को जांच पूरी होने तक शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है।

सेबी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स के समेकित राजस्व का करीब 97-99 प्रतिशत हिस्सा उसकी विदेशी सहायक कंपनियों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित वालकैम्बी एसए से आया था। हालांकि, नियामक का आरोप है कि कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरणों को नियमित रूप से सार्वजनिक नहीं किया।

15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को लेकर सवाल

जांच के आधार पर सेबी ने आरोप लगाया है कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी सहायक कंपनियों द्वारा अर्जित लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व, यानी 99.80 प्रतिशत हिस्से, को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।

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