Repo Rate: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट को आज एक बार फिर से 5.25% पर स्थिर रखा है। फरवरी 2025 के बाद से ब्याज दर लगातार स्थिर बनी हुई है। अब ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अगर नया लोन लेना हो तो फ्लोटिंग रेट लें या फिर फिक्स्ड रेट?
दरअसल रेपो रेट घटने या बढ़ने का असर सिर्फ फ्लोटिंग ब्याज दर पर लोन लिए ग्राहकों पर पड़ता है। फिक्स्ड ब्याज दर वालों पर नहीं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या आरबीआई आने वाले महीने में ब्याज दर बढ़ा सकती है या नहीं और क्या आपको फ्लोटिंग ब्याज दर पर नया लोन लेना चाहिए या नहीं। चलिए इन्हीं सवालों का जवाब जानते हैं?
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह रेट होता है जिस दर पर आरबीआई देश के बैंकों को लोन देती है। अगर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाती है तो बदले में बैंक भी अपने ग्राहकों को बढ़े हुए ब्याज दर पर लोन देते हैं। वहीं अगर आरबीआई ब्याज दर घटाती है तो बैंक भी अपने ग्राहकों को सस्ते ब्याज पर लोन देते हैं।
नए लोन फ्लोटिंग पर ले या नहीं?
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन, हरविंदर सिंह सिक्का, का कहना है कि मौजूदा समय में जब रेपो रेट स्थिर रखा गया है, ऐसे में नए होमबायर्स के लिए फ्लोटिंग रेट एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
फ्लोटिंग रेट का फायदा यह है कि अगर आगे चलकर RBI रेपो रेट में कटौती करता है, तो ग्राहकों की EMI भी कम हो सकती है। हालांकि, जो लोग पूरी तरह से सुरक्षित और तय EMI चाहते हैं, उनके लिए फिक्स्ड रेट सही रह सकता है। इसलिए फैसला अपनी रिस्क लेने की क्षमता और भविष्य की प्लानिंग को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
BASIC Home Loan के अतुल मोंगा के मुताबिक होम लोन के मामले में, रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से ब्याज दरें फिलहाल स्थिर बनी रहेंगी, खासकर फ्लोटिंग रेट लोन वालों के लिए। इससे नए घर खरीदने वालों और पुराने ग्राहकों दोनों को फायदा होगा, क्योंकि लोन सस्ता और किफायती बना रहेगा और हाउसिंग मार्केट में मांग भी बनी रहेगी।
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी, का कहना है कि रेपो रेट के स्थिर रहने से होम लोन बाजार में स्थिरता आई है, जो खरीदारों के लिए सकारात्मक संकेत है। फ्लोटिंग रेट लोन उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो आने वाले समय में ब्याज दरों में संभावित कमी का लाभ उठाना चाहते हैं। वहीं, फिक्स्ड रेट उन ग्राहकों के लिए बेहतर है जो किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं। हमारी सलाह है कि ग्राहक अपनी आय, बजट और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए सही विकल्प चुनें।
आने वालों महीनों में रेपो रेट बढ़ सकता है क्या?
इसका एकदम सटीक जवाब दे पाना मुश्किल है। आरबीआई ब्याज दर यानी रेपो रेट को उस वक्त की मौजूदा स्थिति, जीडीपी और अन्य कारणों को ध्यान में रख कर तय करता है।
जब देश में आर्थिक सुस्ती, कम मुद्रास्फीति (महंगाई), या बाजार में कैश फ्लो बढ़ाना होता है तो ऐसे में आरबीआई रेपो रेट को कम कर देती है। वहीं जब देश में महंगाई (Inflation) रिकॉर्ड स्तर पर हो तब आरबीआई ब्याज दरों को बढ़ाती है।
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