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युद्ध, महंगाई और बाजार की तेज उठापटक के बीच निवेश करना अब आसान नहीं रहा। Nifty 50 पिछले एक साल से लगभग सपाट रहा है, जिससे इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न दबे हैं। ऐसे माहौल में निवेशक अब Multi-Asset Allocation Funds (MAAFs) की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं, जो जोखिम को बैलेंस करने का ऑप्शन दे रहा है।

रिकॉर्ड इनफ्लो

2026 की शुरुआत में इस ट्रेंड ने रफ्तार पकड़ ली। जनवरी में MAAFs में ₹10,485 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश आया, जबकि 12 महीनों में कुल इनफ्लो ₹61,666 करोड़ तक पहुंच गया। यह साल-दर-साल ₹25,869 करोड़ की बढ़ोतरी दिखाता है।

इन फंड्स की खासियत है कि ये इक्विटी, डेट और कमोडिटी (खासकर गोल्ड) में कम से कम 10% आवंटन रखते हैं, जैसा कि SEBI के नियमों में तय है।

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बाजार के हिसाब से बदलाव

MAAFs का फोकस सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि जोखिम-समायोजित रिटर्न देना होता है। फंड मैनेजर तेजी के दौर में इक्विटी बढ़ाते हैं, जबकि अनिश्चितता में गोल्ड और डेट की ओर झुकते हैं। बिजनेस टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक क्वांट म्यूचुअल फंड के संदीप टंडन ने कहा कि अगले 10-20 साल में मल्टी-एसेट फंड्स निवेश का सबसे बड़ा कैटेगरी बन सकते हैं।

WhiteOak Capital के डेटा के मुताबिक, ऐसे पोर्टफोलियो ने 16 साल में 11.4% सालाना रिटर्न दिया, जो BSE Sensex TRI (10.7%) से बेहतर है और बिना सालाना नुकसान के।

पोर्टफोलियो में बदलाव का संकेत

Quant Mutual Fund ने हाल में पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव किए हैं। Wipro से पूरी तरह बाहर निकलकर Lenskart, Hindustan Unilever और Reliance Industries जैसे कंजम्प्शन और नई अर्थव्यवस्था वाले सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया गया है।

साथ ही Adani Green, HDFC Bank और ICICI Prudential AMC जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई गई। यह साफ संकेत है कि फंड IT से हटकर घरेलू मांग और ग्रोथ थीम पर दांव लगा रहा है।

जब इक्विटी में कमजोरी आई, तब गोल्ड ने सहारा दिया। FY25 में करीब 32% और FY26 में लगभग 65% रिटर्न देकर इसने पोर्टफोलियो की गिरावट को संतुलित किया। यही वजह है कि थोड़ी कटौती के बावजूद गोल्ड में निवेश बना हुआ है।

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निवेशकों के लिए क्या मतलब?

MAAFs कोई नया प्रोडक्ट नहीं हैं, लेकिन इनकी ओर रुझान अक्सर बाजार की अस्थिरता में बढ़ता है। मौजूदा उछाल भी उसी पैटर्न का हिस्सा है। असल ताकत इन फंड्स की डायनामिक एलोकेशन और अनुशासित डाइवर्सिफिकेशन में है। इसलिए इन्हें टाइमिंग टूल नहीं, बल्कि लंबी अवधि के ‘ऑल-वेदर’ निवेश विकल्प के तौर पर देखना ज्यादा समझदारी होगी।

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